आउटपुट डिवाइसिज (out put devices)

आउटपुट डिवाइसिज (out put devices) कम्प्यूटर से data को स्वीकार करती है और उसे यूजर (User) के प्रयोग के लिए उपयुक्त रूप से रूपान्तरित करती है। आउटपुट डिवाइसजि दो प्रकार की होती है

1.Soft Copy Output÷

वह  out put devices जिसे कागज पर नहीं लिया जा सकता उसे Soft copy output कहते है। उदाहरणतयाः मॉनीटर पर दर्शाया गया ‘Output या Voice response system द्वारा बोला गया शब्द Soft copy output है।
लाभ:
1.इसे खोजना आसान है।
2.इसे आसानी से संशोधित (Updated) किया जा सकता है।
3.ई-मेल द्वारा इसे आसानी से भेजा जा सकता है।
4.इसके लिए बहुत कम स्थान की आवश्यकता होती है। एक CD में हजारों डॉक्यूमेंट (docurnents) आ सकते है।

2.Hard-copy Output÷

ऐसा out put devices जिसे कागज पर निर्मित किया जा सकता है उसे Hard copy output कहते है।
वे स्वभाव में स्थायी है। उदाहरणतयाः प्रिन्टर द्वारा कागज पर निर्मित output, हार्ड कॉपी आउटपुट के उदाहरण है।
लाभ:
1. कम्प्यूटर बन्द न होने पर भी इसका प्रयोग किया जा सकता है।
2.किसी भी गैर-अधिकारित (Unau horised) परिवर्तन को आसानी से ढूंढा जा सकता है।
3.कुछ यूजर (users) सूचना को पढ़ना पसन्द करते है।
4.उन व्यक्तियों को भी दिया जा सकता है जिनके पास कम्प्यूटर नहीं है।

मॉनीटर [Monitor]

मॉनीटर एक ऐसा आउटपुट डिवाइस out put devices  है। यह टी.वी. स्क्रीन की तरह होती है। मॉनीटर स्क्रीन (Monitor Screen) दो प्रकार की होती है।

1. कैथोड रे ट्यूब (Cathode Ray tube)

2. फलैट पैनल डिसप्ले (Flat Panel Display)

  • Output devices of computer
मॉनीटर आउटपुट को अक्षरों के रूप में दिखाता है। यह इमेज (चित्र) को छोटे-छोटे बिंदुओं, जिन्हें पिक्सल (Pixel) कहा जाता है, से बनाता है।
किसी भी इमेज की स्पष्टता (Resolution) Pixels की संख्या पर निर्भर करता है। आपके मॉनीटर का Resolution कम से कम 1280 x 1024 होना चाहिए।

फ्लैट पैनल डिसप्ले [Flat Panel Display]

‘Flat Panel Display’ को CRT की तुलना में कम आयतन (volume), कम भार और कम विद्युत की आवश्यकता होती है। आप उन्हें दीवारों पर टांग सकते है। Calculator, वीडियो गैम्स, लेपटाप, कम्प्यूटर विज्ञापन बोर्ड और ग्राफिक डिस्पले Flat Panel Display के वर्तमान उदहारण है।

प्रिंटर (Printer)

ये एक महत्त्वपूर्ण आउटपुट डिवाइस  out put devices है।जिसका प्रयोग सूचना को पेज पर प्रिंट करने के लिए किया जाता है।

प्रिंटर के प्रकार [Types of Printers ]

प्रिंटर के विभिन्न प्रकारों को चित्र में दिखाया गया है
Output devices of computer

1.इम्पैक्ट प्रिंटर (Impact Printers)

ये प्रिंटर अक्षरों को छापने (print) के लिए रिबन और कागज पर प्रहार करते है। इसलिए इन्हें इम्पैक्ट प्रिंटर कहते है।

2. नॉन-इम्पैक्ट प्रिंटर (Non-Impact printers)

ये प्रिंटर अक्षरों को छापने के लिए रिबन और पेपर (कागज) पर प्रहार नहीं करते।
इसलिए नान-इम्पैक्ट प्रिंटर कहलाते है। ये प्रिंटर पूरे कागज को एक ही बार में प्रिंट कर देते हैं।
इसलिए इन्हें पेज प्रिंटर भी कहते है।
ये दो तरह के होते हैं.

1. लेजर प्रिंटर (Laser Printers)

2. इंकजेट प्रिंटर (Inkjet Printers)

Impact printers की विशेषताएँ इस प्रकार है।

1.प्रतिबिम्ब को निर्मित करने के लिए कागज के साथ भौतिक सम्पर्क होता है।
2.इसकी व्यय कीमत बहुत कम है।
3.कम कीमत होने के कारण थोक प्रिंटिंग (bulk printing) में लाभदायक है।
4.ये धूल भरे वातावरण में अधिक तापमान में भी कार्य कर सकते है।
5.Impact Printers का बहुत शोर होता है।
6.वे यान्त्रिक प्रकृति के कारण धीमे चलते है।

डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर [Dot Matrix Printers ]

ये सर्वाधिक प्रयोग होने वाले प्रिंटर के वर्ग में आता है। इसके दो प्रमुख कारण है DMP के प्रिंटिंग विशेषताओं का आसान होना और कम लागत पर उपलब्ध होना।
इस प्रकार के प्रिंटरों के प्रिंट हैड में 9×7 पिनों के मैट्रिक्स दिये होते है। पेपर को रिबन और हैड के बीच लगाया जाता है।
यदि ‘A’ को प्रिंट करना है, उससे संबंधित पिने कार्य करेंगी और रिबन पर प्रहार करके ‘A’ को प्रिंट कर देगी।
इस तरह एक अक्षर प्रिंट होता है परन्तु, हमें पूरी लाईन प्रिंट करनी होती है। इसलिए बफर (अस्थायी स्टोरेज), प्रयोग किया जाता है।
एक लाईन से संबंधित सभी अक्षर बफर में संग्रहित होगे और प्रिंटिंग बायें से दाये शुरू करके 1 से 80 वे अक्षर को पेपर पर प्रिंट करेगी।
Output devices of computer
एक लाईन प्रिंट करने के बाद कागज carriage के द्वारा ऊपर की तरफ मूव करता है और फिर से 1 से 80 तक प्रिंट करना शुरू कर देता है।
इस तरह की प्रिंटिंग में हमेशा एक ही दिशा यानि बाये से दाये प्रिंटिंग होती है। नये प्रिंटर दोनों दिशाओं में प्रिंट कर सकते हैं।
पहली लाईन बफर स्टोरेज की पहली पॉजिशन से शुरू होती है।
जैसे ही पहला अक्षर प्रिंट होता है अगली लाईन का 80 वाँ अक्षर भी इसमें स्टोर हो जाता है और इस तरह कार्य होता रहता है।
(एक) पहली लाईन के प्रिंट होने पर, वापस आते वक्त हैड उन अक्षरों की प्रिंटिंग दायी से बायी दिशा में करता है।
जिन्हें इसने बफर में 80 वी से पहली जगह में स्टोर किया था। इस तरह ये दोनों दिशाओं में छापता है। सभी आधुनिक डॉट मैट्रिक्स इसी तरह प्रिंट करते है।
DMP दो आकारों में उपलब्ध है 80 कॉलम और 132 कॉलम काफी दुकानदार (vendor) इनकी सप्लाई करते हैं।
इनमें से कुछ प्रमुख कंपनियों के नाम इस प्रकार है- EPSON, WIPRO, TVSE. GODREJ इत्यादि प्रिंटिग की गति 200 से 360 cps (अक्षर प्रति क्षण) के बीच की होती है।
लाभ:
1.सस्ता (कम लागत)
2.अधिक प्रयोग
3.दूसरी भाषा के अक्षर भी प्रिंट करना
हानि
1.कम गति
2.खराब गुणवता (Poor Quality)

 डेजी व्हील [Daisy Wheel]

इसमें अक्षरों वाला एक व्हील होता है। जिसके प्रत्येक खाँचें (Petal) पर एक अक्षर उभरा (Emboss) होता है।
डेजी व्हील प्लास्टिक और मैटल से बनी डिस्क होती है। जिसके ऊपर अक्षर Outer edge के  साथ लगे होते है।
एक अक्षर प्रिंट करने के लिए प्रिंटर डिस्क को पेपर पर अक्षर प्रिंट होने तक घुमाता है। फिर एक हथौड़ा डिस्क पर मार करता है जिससे अक्षर का Impression पेपर पर आ जाता है।

Daisy wheelOutput Devices of Computer

लाभ:
1.DMP से अधिक विश्वसनीय
2.बढ़िया क्वालिटी
3.अक्षरों के Fonts को आसानी से बदलना
हानि
1.DMP से धीमे
2.अधिक शोर
3.DMP से अधिक महंगा

लाईन प्रिंटर (Line Printer)

ऐसे प्रिंटर जो एक साथ पूरी लाइन प्रिंट करते हैं, लाइन प्रिंटर कहलाते है। ऐसे इम्पैक्ट प्रिंटर का उपयोग, अधिक मात्रा में पेपर प्रिंट के लिए किया जाता है।
ये काफी तेज गति से यानि 300 से 3000 लाइन प्रति मिनट की गति से प्रिंट करते हैं। इस वर्ग के दो सर्वाधिक उपयोग में लाए जाने वाले प्रिंटर है:
ड्रम प्रिंटर और चैन प्रिंटर

 ड्रम प्रिंटर [ Drum Printer]

इस लाईन प्रिंटर में इस होता है। इस की सतह ट्रैक में बढ़ी हुई होती है। कुल ट्रैक की संख्या कागज के आकार जितनी होती है।
यानि यदि कागज की चौड़ाई 132 अक्षर की है तो इस पर 132 ट्रैक होगी। ट्रैक पर अक्षर उभरे (emboss) होते है। कैरेक्टर सेट में सभी संभव अक्षर जोकि प्रिंटर प्रिंट कर सकता है रखे जाते हैं।
मार्किट में विभिन्न (अक्षर समूह) कैरेक्टर सैट उपलब्ध ह 48, 64 और 96 अक्षर समूह ड्रम काफी तीव्र गति से घुमाया जाता है। कागज को ड्रम पर लपेटा जाता है और हर ट्रैक पर एक हैमर (हथौडे) लगे होते हैं।
पेपर और हेमर के मध्य कार्बन रिबन लगा होता है। यदि ट्रैक पर ‘J’ प्रिंट करना है तो जैसे ही ‘J’ उस ट्रैक के हैमर के सामने आएगा, तब वह उसके ऊपर प्रहार करेगा। इस तरह ‘J’ कागज पर उभर आएगा।
Output Devices of Computer
इस तरह एक अक्षर प्रिंट होता है लेकिन हम प्रिंटर से एक लाईन एक बार में प्रिंट करना चाहते है। इसलिए बफर का इस्तेमाल करते हैं, जिसकी संग्रहण क्षमता कागज के आकार जितनी होती है।
Output Devices of Computer
लाईन के सभी अक्षर को बफर में स्टोर किया जाता है और जैसे ही हैमर के सामने आते है सभी हैमर एक साथ प्रहार करते है।
ये बहुत जरूरी है कि सभी हैमर एक ही साथ प्रहार करे ताकि एक लाईन प्रिंट हो सके। यदि ऐसा न हो पाये, तो लहरिया (wavy) परिणाम मिल सकते है।
ड्रम का एक चक्र (rotation) एक लाईन प्रिंट करता है। इस प्रिंटर की गति तेज होती है और ये 300 से 2000 लाईन प्रति मिनट तक कर सकते है। सभी प्रिंटिग विशेषताएं (features) इस प्रिंटर में उपलब्ध है।
लाभ:
1.बहुत तेज गति
हानि:
1.काफी खर्चीली (महंगा)
2.अक्षरों की फॉन्ट (fonts) नहीं बदले जा सकते।
3. प्रहार करने की प्रक्रिया में सही टाईम न होना लहरिया प्रिंट देता है।

चेन प्रिंटर [ Chain Printer]

ये भी एक तरह के लाईन प्रिंटर है क्योंकि ये अक्षर समूह की चैन का प्रयोग करते हैं इसलिए चैन प्रिंटर कहलाते है। ये 2 चक्रो पर बंधी हुई टेप जैसे होती है।
जिसमें अक्षर समूह तीन या चार बार दोहराए होते है। एक स्टैन्डर्ड अक्षर समूह में 48, 64, 96 अक्षर होते हैं।
चेन के अलावा, इस प्रिंटर में चैन के सामने हैमर का सेट इस तरह होता है कि एक स्याही वाला रिबन व पेपर को हैमर व चेन के बीच में रखा जाए।
   चेन तेज गति से घुमती है और अक्षर प्रिंट करने के लिए हम उसी अक्षर का हैमर प्रयोग करते हैं। इस प्रिंटर की गति ज्यादा होती है । इसकी गति 400 से 3000 लाईन प्रति मिनट होती है।
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लाभ:
1.’Character Fonts’ को आसानी से बदला जा सकता है।
2.लहरिया प्रिंट (Wavy Printing) की समस्या नहीं होती क्योंकि चैन स्पाट (horizontally) घूमती है और ड्रम लम्बवत् (vertically) घूमता है।
3.एक ही प्रिंटर से विभिन्न भाषाओं का प्रयोग किया जा सकता है।
हानियां:
1.’Hammer Strike’ का समय बहुत दोषग्राही (Critical) है।
2.विभिन्न साईज के प्रिन्ट और ग्राफिक्स को प्रिन्ट करने की इसमें योग्यता नहीं है।
3. संचालन में शोर होता है।

नान इम्पैक्ट प्रिंटर (Non-Impact Printers)

‘Non-Impact Printer की विशेषताएँ इस प्रकार हैं।
1.”Impact Printer से तीव इनका शोर नहीं होता।
2.इनकी उच्च गुणवत्ता(High quality) है।
3.यह उच्च गुणवत्ता वाले ग्राफिक प्रिंट कर सकता है। बहुत से Fonts और विभिन्न character size प्रिंट कर सकते है।

लेजर प्रिंटर [Laser Printers ]

ये नॉन इम्पैक्ट पेज प्रिंटर होते हैं। ये लेजर बीम का उपयोग
करके अक्षर वाले बिंदुओं को कागज पर छापते है। इसलिए लेजर प्रिंटर कहलाते है।
Output Devices of Computer
प्रिंटिग का कार्य निम्नलिखित चरणों में पूरा होता है
चरण 1 प्रोसेसिंग इकाई से भेजी गई बिटस (Bits) व डाटा लेजर बीम को आन/ऑफ (on/ off) करने के लिए Trigger (ट्रिगर) का कार्य करती है।
चरण 2-आउटपुट डिवाइस में एक इम लगा होता है जिसे साफ (clear) करके, उसे पाजीटिव (positive) विद्युत चार्ज प्रदान किया जाता है।
एक कागज प्रिंट करने के लिए लेजर बीन लेजर से निकल कर इम की सतह आगे और पीछे से स्कैन करती है।
इस का पाजीटिव इलेक्ट्रिक चार्ज उन्ही भागों द्वारा संग्रहित (Store) किया जाता है। जोकि लेजर बीम के सम्पर्क में आते है।
चरण 3 लेजर के संपर्क में आए इस के हिस्से स्याही पाउडर को आर्कषित करते है जिसे टोनर कहा जाता है।
चरण 4. इस आकर्षित स्याही पाउडर को पेपर (कागज) पर ट्रांसफर किया जाता है।
चरण 5.स्याही के कण कागज पर स्थायी रूप से जमा हो जाते है।
चरण 6 ड्रम वापस क्लीनर की तरफ घूम जाती है जहाँ पर खड़ ब्लेड अधिक स्याही को करते हैं और इम को अगला कागज प्रिंट छापने के लिए तैयार करते है।
लाभ:
1.उनकी बहुत उच्च गति है।
2.उनकी आऊटपुट बहुत उच्च गुणवत्ता की है। यह गुणवत्ता के अच्छे ग्राफिक प्रदान करते हैं।
3.बहुत से Fonts और विभिन्न character size प्रिन्ट कर सकते है।

इंकजेट प्रिंटर [InkJet Printers ]

ये नान इम्पैक्ट प्रिंटर नई तकनीक पर आधारित है। ये प्रिंटर अक्षरों को प्रिंट करने के लिए स्याही की बूंदे कागज पर स्प्रे (spray) करते हैं। ये प्रिंटर बढ़िया गुणवत्ता (High Quality) प्रदान करते है।
ये कम आवाज करते है क्योंकि इनमें हैमर का प्रयोग नहीं होता और इनमें प्रिंटिग के विभिन्न तरीके (modes) उपलब्ध है।
रंगों की छपाई इसमें संभव है। इस प्रिंटर के कुछ माडल प्रिंटिंग की बहुत सारी (multiple) प्रतिया निकाल सकते है।
Output Devices of Computer
लाभ:
1.उच्च क्वालिटी की प्रिंटिग (High Quality printing) 2.विश्वसनीयता का अधिक होना (More reliable)
हानि:
1.मंहगे क्योंकि प्रति पृष्ठ लागत अधिक
2.लेजर प्रिंटर के मुकाबले धीमे

 द्वितीय  स्टोरेज डिवाइसिज (Secondary Storage Devices ]

आओ निम्नलिखित द्वितीय स्टोरेज डिवाइसिज के बारे में चर्चा करें।
(i)मेग्नेटिक टेप (Magnetic Tape )
(i) मेग्नेटिक डिस्क (Magnetic Disk)
(iii)फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk)
(iv) ऑपटिकल डिस्क (Optical Disk)

मेग्नेटिक टेप (Magnetic Tape)

ये काफी ज्यादा डाटा को स्टोर करने का लोकप्रिय माध्यम है। मेग्नेटिक टेप ओडियो टेप की तरह काफी लंबी टेप होती है। इसका रिबन प्लास्टिक का बना होता है।
इसकी चौडाई ५५ और लंबाई 2400 फीट होती है। टेप की ऊपरी सतह पर चुबंकीय पदार्थों का लेप होता है। डाटा को मेग्नेटाईज बिट के रूप में स्टोर किया जाता है जोकि स्थायी होती है।
टेप में स्टोर डाटा को बार-बार पढ़ा जा सकता है जैसे कि आडियों टेप को बार-बार सुना जा सकता है। जैसे डाटा को स्टोर करने के लिए पुराने डाटा को मिटाना (erase) पड़ता है। इस तरह टेप को reuse किया जा सकता है।
Output Devices of Computer
मेग्नेटिक टेप ट्रेक्स (tracks) और फ्रेम्स (Frames) में बंटी होती है जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।
Output Devices of Computer
ज्यादातर टेप 9-ट्रेक वाली होती है। 7 ट्रेक वाली टेप भी उपलब्ध है। यानि इसमें 9 कतारे (rows) होती है।
टेप के एक इंच में रिकार्ड कैरेक्टर की संख्या को टेप घनत्व (Tape density) कहा जाता है। 800bpi (बिट प्रति इंच-Bits per (inch), 1600bpi और 6250 bpi कुछ प्रचलित टेप घनत्व है।
Output Devices of Computer
मेग्नेटिक टेप इकाई की सामान्य खाका चित्र  में दिखाई गई है। टेप की इकाई में एक सप्लाई रील होती है जो Read/ write एसेबली से होकर टेकअप रील तक जाती है।
टेप वेक्यूम चैंबर से होकर गुजरते है। टेप की ज्यादा लंबाई इसलिए रखी जाती है ताकि जब ये spools एकदम से शुरू या रोके जाए तो टेप को कोई नुकसान न हो।
अगर टेप 7-चैनल की है तो Read/ write एसेंबली में 7 Read/ write हैड होंगे। इसी तरह अगर 9- चैनल की टेप है तो 9 Read/write हैड होगे।
यानि प्रत्येक ट्रेक के लिए अलग से हैड होता है। डाटा को टेप में ब्लाक (Block) के रूप में स्टोर किया जाता है जैसा कि में दिखाया गया है। एक ब्लाक को रीड करते वक्त टेप समान गति से चलती रहती है।
डाटा की प्रोसेसिंग करते वक्त टेप से डाटा रीड नहीं करना पड़ता यानि उस वक्त टेप को रूक जाना चाहिए। लेकिन एक निश्चित गति से चलती हुई टेप एकदम से नहीं रुक पाती।
इसी तरह यदि टेप रुकी हुई है तो एकदम से डाटा को पढ़ने के लिए चल नहीं सकती। इसलिए टेप में डाटा के दो ब्लाक के बीच में थोड़ी लंबाई खाली छोड़ी जाती है।
ताकि निश्चित गति से चलती हुई टेप की गति पहले कम हो जाए और फिर रुक जाए और शुरू होते वक्त पहले गति बढे और फिर उसी निश्चित गति तक पहुँच जाए।
इस टेप में दो ब्लाक (Block) में छोड़ी जाने वाली खाली जगह को Inter Block Gap (IBG) कहते है।
Output Devices of Computer

 मेग्नेटिक टेप के अनुप्रयोग क्षेत्र [Application Area of Megnetic Tapes]

ये टेप निम्नलिखित क्षेत्रों में उपयोगी हैं
1. Serial या sequential (क्रमवार) प्रोसेसिंग
2. टेप पर बैकअप लेना काफी सस्ता पड़ता है।
3. काफी ज्यादा डाटा को स्टोर करने के लिए उपयुक्त
4. विभिन्न मशीनों के बीच में सूचना के आदान प्रदान के लिए उपयुक्त

मेग्नेटिक टेप के लाभ [Advantages of Magnetic Tape)

1. कीमत (Cost) ये डाटा को स्टोर करने के सबसे सस्ता माध्यम में से एक है। इसलिए टेप पर डाटा का बैकअप लिया जाता है।
2 संग्रहण क्षमता (Storage Capacity) इसकी संग्रहण क्षमता काफी ज्यादा है।
3. रिकार्ड की लंबाई (Any Length Record): ये किसी भी लंबाई के रिकार्ड को स्टोर कर सकता है।
4 दुबारा प्रयोगिक (Reusable) हम किसी जगह से डाटा को मिटा कर उसी जगह दूसरा स्टोर कर सकते है। इस तरह इसे दूद्वारा प्रयोग में लाया जा सकता है।
5 वहनीय (Portability) ये आसानी से वहनीय है।

 मेग्नेटिक टेप से हानियाँ [Disadvantages of Magnetic Tapel

1. एक्सेस टाईम (Access Time)

किसी डाटा को एक्सेस करने के लिए उससे पहले स्टोर सारे रिकार्ड को एक्सेस करना पड़ता है। इसलिए टेप में एक्सेस टाईम ज्यादा होता है।

2. लचीलापन (Flexibility)

टेप में कम लचीलापन है।

3. स्थांतरण गति (Transmission speed)

टेप में डाटा की स्थांतरण की गति कम होती है।

4,क्षति की संभावना (Vulnerable to Damage):

टेप के धूल या संभालने की लापरवाही की वजह से क्षतिग्रस्त होने की संभावना अधिक होती है।

मेग्नेटिक डिस्क [Magnetic Disk ]

ये एक स्टोरेज डिवाइस है। डिस्क पर दोनों तरफ से मेग्नेटिक (चुंबकीय) तत्व की पतली परत चढ़ी होती है। यह तत्व 0 या हमेशा के लिए स्थायी रूप से संग्रह कर सकता है।
डिस्क को एक के उपर एक रखकर स्टैक (Stack) की तरह डिस्क पैक बनाया जाता है। सामान्यतः इसमें 6 डिस्क होती है। डिस्क पैक में एक स्पेडल होता है जिसे मोटर से जोड़ा जाता है।
ये मोटर बहुत तेज गति करीबन 3600rpm (revolution per minute) चक्र प्रति मिनट की गति से घूमती है। डिस्क पैक की सभी डिस्क साथ-साथ समान गति से एक ही दिशा में (मोटर की गति की दिशा) में घूमती है।
प्रत्येक डिस्क वृताकार ट्रेक (Circular tracks) में बंटी होती है। प्रत्येक ट्रेक (track) भी सेक्टर (sectors) में बंटी हुई होती है। डिस्क पैक की 6 डिस्क में 12 सतह होती है।
डिस्क पैक की सबसे ऊपर की डिस्क की ऊपरी परत व सबसे नीचे की डिस्क की नीचे की परत को छोड़कर शेष सभी डिस्को के दोनों ओर सूचनाओं का संग्रह (Store) किया जाता है।
यानि 10 परतों का उपयोग संग्रहण के लिए किया जाता है।
डिस्क की क्षमता को मापा जा सकता है। जैसे डिस्क में 10 परत होती है, हर परत में 512 ट्रेक होती है ।
प्रत्येक ट्रेक में 40 सेक्टर है और प्रत्येक सेक्टर 512 बाइट स्टोर करता है तो कुल संग्रहण क्षमता होगी।
10 x 512X40X512 बाईट = 100 मेगाबाईट
Output Devices of Computer
प्रत्येक ट्रेक संबंधित डिस्क पर सिलिंडर बनाते हैं। यानि सिलेण्डर की संख्या प्रत्येक परत की ट्रेक की संख्या जितनी होगी।
डिस्क पैक की हर सतह के ऊपर Read/Write हैंड लगा होता है। ये हैड एक कंधीनुमा बाजू (comb-like arm) पर लगे होते हैं और सदैव रेडियल की तरह घूमते है (अंदर-बाहर की दिशा में)
Output Devices of Computer
डिस्क ड्राईव में Read/write हेड का प्रयोग डाटा को डिस्क से पढ़ने और लिखने के लिए किया जाता है। कुछ डिस्क ड्राइव में स्थिर Read/write हैड होते हैं।
स्थिर (Fixed) हैड में प्रत्येक ट्रैक का अपना Read/Write हैड होता है जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। किसी रिकार्ड को एक्सेस करने में लगने वाले समय Rotational delay होता है।
काफी सारे Read/write हैड को प्रयोग होने के कारण और इसे वायु रहित (air tighit) सीलिंग करने के कारण इसे winchester डिस्क कहते है।
इस डिस्क की पैकिंग घनत्व बेहतर होता है इसलिए ये अपने आकार से ज्यादा स्टोरेज क्षमता प्रदान करती है।
चलित हैड (moving head) डिस्क में हर परत पर एक Read/Write होता है जैसा कि चित्र  में दिखाया गया है। Read/ write हैड की बाजू रिकार्डिंग परत (सतह) पर इस तरह आगे-पीछे होती है ।
ताकि किसी भी ट्रैक पर डाटा को पढ़द्म या लिखा जा सके। सभी Read/ write हैड एक साथ घमते है और सभी एक ही vertical plane में समान रूप से ट्रैक पर स्थिर होते रहते है।

एक्सेस समय [Access Time]

एक्सेस समय के तीन भाग होते हैं। क्रमशः सीक टाईम (Seek time), लैटेसी टाईम (Latency time) और डाटा ट्रांसफर टाईम (data transfer time)

1. सीक टाईम (seek time)

Read/write हैड को वांछित ट्रैक तक पहुंचने में लगने वाला समय सीक टाईम कहलाता है।
उदाहरण के रूप में, यदि Read/write हैड ट्रैक 2 पर है और हम ट्रैक 5 पर स्टोर रिकार्ड (record) को पढ़ना चाहते है, तो रीड/राईट (read/ write) को ट्रैक 2 से 5 तक जाना होगा।
आधुनिक डिस्क में औसत सीक टाईम 8 से 12 मिली सेकेंड है।

2. रोटेशनल डीले या लेटेसी टाईम (rotational delay or latency time):

जब रीड/राईड हैड वाहित ट्रैक पर पहुंच जाता है तो उसे किसी विशेष सैक्टर तक पहुंचने में लगने वाले समय को rotational delay कहते है।
ये delay डिस्क की घूमने (rotation) की गति पर निर्भर करता है। औसत रूप से लेटेसी एक चक्र समय (revolution time) का आधा होता है। औसत लेटेसी समय 4.2 से 6.7 मिली सेकेंड है।

3. डाटा ट्रांसफर टाईम (Data transfer time)

डाटा को एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने में लगने वाला समय डाटा ट्रांसफर टाईम कहलाता है।
सीक टाईम एक्सेस टाईम का एक महत्त्वपूर्ण तत्व है इसलिए फाईल को इस तरह स्टोर करना चाहिए ताकि सीक टाईम कम से कम हो।
मैग्नेटिक डिस्क काफी आकारों और अलग-अलग क्षमता में उपलब्ध है। पहले ये 20MB से 850MB तक आती थी।
आजकल मेग्नेटिक डिस्क की स्टोरेज क्षमता 10GB, 20GB और 40GB, 80 GB, 160 Gb, 320 GB, 1 TB है।

 मैग्नेटिक डिस्क के लाभ [Advantages of Magnetic Disks]

1.  एक्सेस टाईम (Access time)

मेग्नेटिक डिस्क में एक्सेस टाईम कम होता है।

2. लचीलापन (Flexibility):

मेग्नेटिक डिस्क काफी लचीली है। क्योंकि इसे क्रमबद्ध (sequential) के साथ-साथ सीधे (direct) एक्सेस स्टोरेज दोनों तरह से उपयोग किया जा सकता है।

3. स्थांतरण गति (Transmission speed) :

मेग्नेटिक डिस्क में डाटा ट्रांसफर गति की दर (Rate) (अधिक) तेज होती है।

4.रियूजेबल (Reusable)

हम किसी विशेष डाटा को मिटाकर उसकी जगह दूसरा डाटा (पुनः उपयोग संभव) स्टोर कर सकते हैं। इस तरह इसे दोबारा उपयोग किया जा सकता है।

4.संग्रहण क्षमता (Storage capacity)

ये काफी ज्यादा डाटा स्टोर कर सकती है।

 मेग्नेटिक डिस्क की हानियाँ [Disadvantages of Magnetic Disks]

1. कीमत (Cost)

इसमें प्रति कैरेक्टर स्टोरेज की कीमत मेग्नेटिक टेप से ज्यादा होती है।

2. पॉरटेबिल्टी (Portability)

इसकी पॉरटेबिल्टी मेग्नेटिक टेप से काफी कम है।
3. रिकार्ड का सीमित आकार (Limited size record) इसमें स्टोर होने वाली रिकार्ड की लंबाई डिस्क ट्रेक पर निर्भर करती है।

 फ्लापी डिस्क [Floppy Disk]

ये छोटी, सरल और सस्ती डिस्क ईकाई है। ये लचीली प्लास्टिक से बनी होती है। डिस्क पर दोनो तरफ से मेग्नेटिक तत्व की पतली परत चढ़ी होती है।
इसे स्टोर करने के लिए आयताकार प्लास्टिक की जैकेट होती है जो इसे रख-रखाव में सुरक्षा प्रदान करती है।
Output Devices of Computer
फ्लॉपी विभिन्न आकारों में उपलब्ध है। फ्लापी के बीच में एक छेद होता है जिसे हब (HUB) कहते है।
जोकि हिस्क को घूमने में मदद करता है। R/W sensor का प्रयोग हैड द्वारा पैलापी से डाटा पढ़ने के लिए किया जाता है। फैलापी में डाटा का स्टोरेज ट्रैक और सेक्टर में होती है।
Index hole फ्लॉपी की शुरूआत दर्शाता है। Notch का उपयोग पैलापी को write protected बनाने के लिए किया जाता है जिससे डिस्क के उपर डाटा न लिखा जा सके।
Floopy के आविष्कार (1972) के बाद से ही यह काफी विभिन्न प्रकारों में उपलब्ध है। पहले पैलापी इंच की होती थी उसके बाद 5.25 और 3.5″ आकार आज उपलब्ध है।
Output Devices of Computer
1.44MB भंडारण क्षमता सबसे अधिक प्रसिद्ध है। इसका रख-रखाव अन्य डिस्क से आसान है। Unformatted फ्लापी की क्षमता formatted से ज्यादा होती है।
फ्लॉपी डाटा संग्रहण का सबसे सस्ता माध्यम है। नये आविष्कारों से यह बात साबित होती है कि जल्द ही 20MB से ज्यादा संग्रहण क्षमता वाली फ्लापी भी बाजार में उपलब्ध होगी।

ओपटिकल डिस्क [Optical Disks]

मेग्नेटिक टेप और मेग्नेटिक डिस्क के अतिरिक्त एक नया स्टोरेज माध्यम जो लोकप्रिय है, वह है ओपटिकल डिस्क यह गोलाकार डिस्क होती है। ओपटिकल डिस्क में डाटा को संग्रहित करने हेतु ट्रेक्स का उपयोग किया जाता है।
Output Devices of Computer
ये ट्रैक्स सैक्टर्स में बंटे होते है। ओपटिकल डिस्क के ट्रैक्स फ्लापी या हार्ड डिस्क की तरह बन्द न होकर निरन्तरता लिये होते हैं। जिनकी लम्बाई लगभग 5 कि.मी. होती है।
उच्च क्षमता के लेजर बीम द्वारा इसकी सतह पर पिट (Pit) का निर्माण किया जाता है। जो कि ‘1’ को अभिव्यक्त करता है। डाटा पढ़ने हेतु कम क्षमता के लेजर बीम का  प्रयोग करते है।
Output Devices of Computer

ओपटिकल डिस्क के लाभ [Advantages of Optical Disks]

1.इसकी क्षमता अधिक है। (Large capacity)
2. इसका आकार कम है। (Compact size)
3.यह कम खर्चीला है (In-expensive)
4.यह बहुत तीव्र है (Very fast)
(v) इसकी उच्च विश्वसनीयता है (Better reliability)
(vi) यह लम्बे समय तक चलती है। (Longer-life)
(vi) इसे सुगमता से एक स्थान से दूसरे स्थान तक लाया जा सकता है। (Portability)

ओपटिकल डिस्क की हानियाँ [Disadvantages of Optical Disks]

 (1) यह केवल पढ़ने योग्य है और इसे ‘update’ नहीं किया जा सकता।
(ii) मेग्नेटिक डिस्क की तुलना में इसका Access Time ज्यादा है।

 ओपटिकल डिस्क के प्रकार [ Optical Disks Type]

ओपटिकल डिस्क मुख्यता दो प्रकार की होती है।

कम्पैक्ट डिस्क [Compact Disks (CD) ]

CD बहुत सस्ती स्टोरेज डिस्क है। एक CD में 700 MB डाटा स्टोर किया जा सकता है। CD पर स्टोर डाटा को पढ़ने के लिए हम पहले CD को CD ड्राईव में डालते है।
Output Devices of Computer
पहला CD ड्राईव डाटा को 150kbps (Kilobytes per second) की गति से पढ़ सकती है। आज CD Drive की गति 2x, 4x, 8x इत्यादि के रूप को व्यक्त की जाती है।
एक 2x ड्राईव, डाटा को 300kbps की गति से पढ़ता है। उस समय सबसे अधिक तीव्र उपलब्ध CD, 75x की गति पर listed यी जिसका अर्थ है कि यह डाटा को 11,250 kbps की दर पर पढ़ सकती है।
Output Devices of Computer

 डी वी डी डिस्क [DVD Disks]

DVD की CD-ROM से डाटा संग्रहण की क्षमता अधिक है। वर्तमान में सभी मूवीज DVD पर उपलब्ध होती है।
DVD अधिक सस्ता एवं अच्छी क्वालिटी का है। DVD दिखने में CD की तरह ही दिखती है।
किन्तु इसकी क्षमता अधिक होती है। वर्तमान मे 4.7 GB, 8.5 GB, 20 GB की DVD उपलब्ध है।
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